पश्चिमी सिंहभूम/नोवामुंडी। झारखंड के खनिज संपदा से समृद्ध पश्चिमी सिंहभूम जिले के नोवामुंडी क्षेत्र से सामने आई एक तस्वीर ने ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक बीमार व्यक्ति को ग्रामीणों ने करीब तीन किलोमीटर तक खटिया पर उठाकर मुख्य सड़क तक पहुंचाया, ताकि उसे अस्पताल ले जाया जा सके।
यह घटना 7 सितंबर 2026 की बताई जा रही है, जिसका वीडियो बाद में सामने आया। मामले की रिपोर्ट 13 सितंबर को प्रकाशित हुई। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक मरीज की पहचान मणकी सिद्धू, निवासी बोकना गांव के तिरिलपी टोला, नोवामुंडी प्रखंड, पश्चिमी सिंहभूम के रूप में हुई है।
बारिश में रास्ता बना बड़ी बाधा
ग्रामीणों के अनुसार, तिरिलपी टोला तक पक्की सड़क की सुविधा नहीं है। बारिश के दौरान गांव के पास बनी छोटी पुलिया पानी में डूब जाती है, जिससे टोला का मुख्य सड़क से संपर्क प्रभावित हो जाता है।
ऐसी स्थिति में जब किसी ग्रामीण की तबीयत गंभीर होती है, तो वाहन को गांव तक पहुंचाना मुश्किल हो जाता है। इसी वजह से मणकी सिद्धू को भी ग्रामीणों ने खटिया पर उठाया और करीब तीन किलोमीटर तक पैदल चलकर उन्हें उस स्थान तक पहुंचाया, जहां से वाहन की मदद ली जा सकी। इसके बाद उन्हें नोवामुंडी अस्पताल ले जाया गया।
नोवामुंडी अस्पताल से चाईबासा किया गया रेफर
रिपोर्टों के मुताबिक नोवामुंडी अस्पताल में मणकी सिद्धू को प्राथमिक उपचार दिया गया। इसके बाद चिकित्सकों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए चाईबासा रेफर किया।
हालांकि, परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्हें चाईबासा ले जाना संभव नहीं हो सका। रिपोर्ट के अनुसार इलाज का खर्च जुटाने में असमर्थ परिवार 10 सितंबर को मणकी सिद्धू को वापस गांव ले आया।
खनन क्षेत्र में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं पर सवाल
नोवामुंडी देश के प्रमुख खनन क्षेत्रों में गिना जाता है। ऐसे क्षेत्र से किसी मरीज को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए तीन किलोमीटर तक खटिया पर ले जाने की तस्वीर ने विकास के दावों और ग्रामीणों की जमीनी हकीकत के बीच अंतर पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामले को लेकर पूर्व मंत्री एवं भाजपा नेता बड़कुंवर गागराई ने भी सवाल उठाए। उन्होंने क्षेत्र में सड़क, पुल, अस्पताल और एंबुलेंस जैसी बुनियादी सुविधाओं में सुधार की मांग की है।
गागराई ने 108 एंबुलेंस सेवा, सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था तथा खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए उपलब्ध DMFT और CSR फंड के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए हैं। ये उनके द्वारा उठाए गए राजनीतिक/सार्वजनिक सवाल हैं; इन आरोपों की स्वतंत्र प्रशासनिक पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं मिली है।
असली सवाल: विकास आखिर किसके लिए?
नोवामुंडी की यह तस्वीर केवल एक मरीज को खटिया पर ले जाने की घटना नहीं है। यह उस बड़े सवाल की ओर ध्यान खींचती है कि अगर किसी गांव तक एंबुलेंस या सामान्य वाहन बारिश के दिनों में नहीं पहुंच सकता, तो आपात स्थिति में वहां रहने वाले लोगों के लिए स्वास्थ्य सुविधा कितनी सुलभ है?
बीमारी, दुर्घटना या प्रसव जैसी आपात स्थिति में कुछ किलोमीटर की दूरी भी जिंदगी और मौत के बीच का अंतर बन सकती है। ऐसे में सड़क, पुल और समय पर उपलब्ध परिवहन केवल विकास की सुविधाएं नहीं, बल्कि ग्रामीणों के लिए आवश्यक जीवनरक्षक व्यवस्था हैं।
ग्रामीणों की मांग है कि तिरिलपी टोला तक बेहतर सड़क संपर्क और स्थायी पुल/पुलिया की व्यवस्था की जाए, ताकि बारिश के दौरान गांव का संपर्क न टूटे और गंभीर मरीजों को इस तरह खटिया पर उठाकर मुख्य सड़क तक ले जाने की मजबूरी खत्म हो।
प्रशासन के सामने बड़ा सवाल
नोवामुंडी जैसे खनन क्षेत्र से सामने आई यह तस्वीर प्रशासन और संबंधित विभागों के लिए एक गंभीर सवाल छोड़ती है—क्या विकास का लाभ उन गांवों तक भी पहुंच रहा है, जहां एक बीमार व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को तीन किलोमीटर तक खटिया उठाकर चलना पड़ता है?
जब तक सड़क, पुल और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं गांव के दरवाजे तक नहीं पहुंचतीं, तब तक कागजों पर दर्ज विकास और जमीन पर मौजूद वास्तविकता के बीच यह दूरी बनी रहेगी।








