देहरादून | 1 सितंबर 2026
हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की जनसभा के बाद सामने आए कथित ‘शुद्धिकरण’ विवाद और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज FIR को लेकर उत्तराखंड की राजधानी देहरादून मंगलवार को सियासी हलचल का केंद्र बनी रही। कांग्रेस ने FIR को राजनीतिक कार्रवाई बताते हुए बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के साथ सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया और सचिवालय कूच का ऐलान किया।
कांग्रेस भवन से शुरू हुआ यह मार्च जैसे-जैसे सचिवालय की ओर बढ़ा, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए सुभाष रोड सहित विभिन्न स्थानों पर बैरिकेडिंग कर दी। इसके बाद माहौल उस समय और गर्म हो गया, जब कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने बैरिकेडिंग पार करने की कोशिश शुरू कर दी।
बैरिकेडिंग पर चढ़े गणेश गोदियाल, यशपाल आर्य भी प्रदर्शन में रहे मौजूद
प्रदर्शन का नेतृत्व उत्तराखंड कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने किया। उनके साथ नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य समेत कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता और बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता मौजूद रहे।
पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड्स के सामने कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की और आगे बढ़ने की कोशिश की। इस दौरान गणेश गोदियाल और अन्य नेताओं को बैरिकेडिंग पर चढ़कर विरोध जताते देखा गया। बाद में पुलिस ने गोदियाल को हिरासत में ले लिया।
रिपोर्टों के मुताबिक प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। कांग्रेस का कहना था कि वह शांतिपूर्ण तरीके से सचिवालय तक जाकर अपनी मांग सरकार के सामने रखना चाहती है, जबकि पुलिस की प्राथमिकता प्रदर्शनकारियों को प्रतिबंधित क्षेत्र की ओर बढ़ने से रोकना रही।
हरक सिंह रावत की तबीयत बिगड़ी
प्रदर्शन के दौरान पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत की तबीयत अचानक बिगड़ गई। मौके पर मौजूद लोगों के मुताबिक धक्का-मुक्की के बीच उनकी तबीयत खराब होने के बाद उन्हें उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार उनकी स्थिति खतरे से बाहर बताई गई।
इस घटनाक्रम ने प्रदर्शन के बीच मौजूद कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों की चिंता भी बढ़ा दी।
आखिर क्या है पूरा विवाद?
दरअसल, विवाद की शुरुआत 8 अगस्त 2026 को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की जनसभा के बाद हुए कथित ‘शुद्धिकरण हवन’ से हुई।
कांग्रेस का आरोप है कि खरगे के कार्यक्रम के बाद सभा स्थल पर शुद्धिकरण की रस्म किया जाना दलित समाज और खरगे के प्रति भेदभावपूर्ण मानसिकता को दर्शाता है। इसी मुद्दे को लेकर राहुल गांधी ने 29 अगस्त को प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग की थी कि कथित शुद्धिकरण करने वालों के खिलाफ SC/ST कानून के तहत FIR दर्ज की जाए।
राहुल गांधी ने इस घटना को जातिगत भेदभाव और सामाजिक समानता से जोड़ते हुए इसकी आलोचना की थी। कांग्रेस का कहना है कि मामला सिर्फ खरगे का नहीं, बल्कि देश में दलितों के सम्मान और संवैधानिक समानता से जुड़ा मुद्दा है।
राहुल गांधी पर क्यों दर्ज हुई FIR?
राहुल गांधी के बयान के बाद हल्द्वानी में उनके खिलाफ FIR दर्ज की गई। शिकायतकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी ने धार्मिक आयोजन को जातिगत रंग देकर विभिन्न समुदायों के बीच वैमनस्य पैदा करने वाली बातें कहीं।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार FIR में भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के साथ SC/ST एक्ट की धाराएं भी लगाई गई हैं। शिकायतकर्ता ने यह भी कहा कि वह वाल्मीकि समुदाय से हैं और 11 अगस्त को रामलीला मैदान में सफाई एवं धार्मिक अनुष्ठान में शामिल लोगों में से थे। उनका दावा था कि इस आयोजन का किसी व्यक्ति या जाति से संबंध नहीं था।
यही FIR अब उत्तराखंड कांग्रेस के विरोध का मुख्य केंद्र बन गई है।
कांग्रेस की मांग—राहुल गांधी पर दर्ज मुकदमा वापस हो
देहरादून के प्रदर्शन में कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि उनकी मुख्य मांग राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज FIR को वापस लेना है। इसके साथ ही कांग्रेस ने हल्द्वानी में हुए कथित शुद्धिकरण कार्यक्रम के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग दोहराई।
कांग्रेस नेताओं ने FIR को राजनीतिक द्वेष से प्रेरित बताते हुए कहा कि जिस नेता ने कथित भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई, उसी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करना लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों पर सवाल खड़ा करता है। प्रदेश कांग्रेस ने इससे पहले DGP कार्यालय में भी ज्ञापन देकर FIR निरस्त करने की मांग की थी और मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी थी।
दूसरी तरफ BJP और सरकार का क्या कहना है?
विवाद पर भाजपा और उत्तराखंड सरकार ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि कथित हवन/शुद्धिकरण कार्यक्रम को भाजपा कार्यकर्ताओं से जोड़ना उचित नहीं है। उनके अनुसार आयोजन धार्मिक संगठन से जुड़ा था और इसका उद्देश्य सभा स्थल पर फैली गंदगी तथा वहां हुए कथित नारों के बाद धार्मिक अनुष्ठान करना था।
भाजपा की ओर से यह भी कहा गया है कि पूरे मामले को जातिगत रंग दिया जा रहा है, जबकि कांग्रेस इसे दलित सम्मान और सामाजिक न्याय का मुद्दा बता रही है।
यानी इस पूरे विवाद में दोनों दलों की कहानी और राजनीतिक व्याख्या बिल्कुल अलग है—और यही वजह है कि हल्द्वानी से शुरू हुआ विवाद अब देहरादून की सड़कों तक पहुंच चुका है।
सड़क पर बढ़ता राजनीतिक तनाव
देहरादून में मंगलवार का प्रदर्शन केवल राहुल गांधी की FIR के विरोध तक सीमित नहीं रहा। बैरिकेडिंग पर चढ़ते नेता, पुलिस की रोक-टोक, कार्यकर्ताओं की नारेबाजी और वरिष्ठ नेता की तबीयत बिगड़ने की घटना ने प्रदर्शन को और हाई-प्रोफाइल बना दिया।
कांग्रेस ने संकेत दिया है कि अगर राहुल गांधी के खिलाफ FIR वापस नहीं ली गई और हल्द्वानी के कथित शुद्धिकरण मामले में कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जा सकता है। पार्टी ने पहले ही प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में शिकायतें और प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं।
फिलहाल हल्द्वानी का ‘शुद्धिकरण’ विवाद उत्तराखंड की राजनीति में एक बड़े टकराव का रूप ले चुका है। एक तरफ कांग्रेस इसे सामाजिक न्याय, दलित सम्मान और संविधान की लड़ाई बता रही है, वहीं भाजपा इसे राजनीतिक मुद्दा बनाकर पेश किए जाने का आरोप लगा रही है। देहरादून का मंगलवार का प्रदर्शन इसी बढ़ती राजनीतिक खींचतान की एक बड़ी तस्वीर बनकर सामने आया।







