रांची/खूंटी, झारखंड | 24 अक्टूबर 2026
झारखंड के खूंटी जिले में मिशनरी स्कूल के प्राचार्य फादर बेनेदिक्त बारला पर हुए जानलेवा हमले के मामले में पुलिस ने तीन नाबालिग पूर्व छात्रों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों का मकसद स्कूल परिसर से नकदी और मोबाइल फोन चुराना था। इसी दौरान फादर बारला से सामना होने पर उन पर हमला किया गया। मामले में एक अन्य नाबालिग आरोपी की तलाश जारी होने की जानकारी 23 अक्टूबर को The Indian Express ने पुलिस के हवाले से दी।
घटना के बाद खूंटी और रांची में ईसाई समुदाय सहित स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन और मार्च निकालकर निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई तथा फादर बारला की सुरक्षा की मांग की।
स्कूल परिसर में घायल अवस्था में मिले फादर
फादर बेनेदिक्त बारला, जिन्हें फादर बेनी के नाम से भी जाना जाता है, खूंटी स्थित आरसी बालक मध्य विद्यालय (St Michael School) के प्राचार्य हैं। उन पर स्कूल परिसर में रात के समय हमला हुआ। स्थानीय मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, घटना 20 अक्टूबर की रात हुई थी। अगले दिन सुबह वह गंभीर रूप से घायल और बेहोशी की हालत में मिले।
उन्हें पहले खूंटी सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए रांची के पल्स अस्पताल में भर्ती कराया गया। शुरुआती रिपोर्टों में उनके सिर पर गंभीर चोटों की जानकारी सामने आई थी।
पुलिस के मुताबिक, चोरी के इरादे से घुसे थे आरोपी
मिली जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपी स्कूल के पूर्व छात्र और नाबालिग हैं। पुलिस का आरोप है कि वे नकदी और मोबाइल फोन चोरी करने के इरादे से स्कूल परिसर में दाखिल हुए थे।
खूंटी के पुलिस अधीक्षक ऋषभ गर्ग के अनुसार, आरोपियों को उम्मीद नहीं थी कि वहां फादर बारला मौजूद होंगे। उनसे सामना होने पर पकड़े जाने और पहचान उजागर होने के डर से आरोपियों ने उन पर हमला किया और वहां से भाग निकले।
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के पास से कथित तौर पर चोरी की गई नकदी और फादर बारला का मोबाइल फोन बरामद किया है। पुलिस के मुताबिक, मामले में एक अन्य नाबालिग संदिग्ध फरार है और उसकी तलाश की जा रही है। ये विवरण पुलिस के आरोपों पर आधारित हैं; मामले की न्यायिक प्रक्रिया अभी अलग विषय है।
प्रशासन ने क्या कार्रवाई की?
घटना की गंभीरता को देखते हुए खूंटी के एसपी ऋषभ गर्ग ने आठ पुलिस पदाधिकारियों की विशेष जांच टीम (SIT) गठित की थी। टीम में एएसपी अभियान क्रिस्टोफर केरकेट्टा, एसडीपीओ मंगल सिंह जामुदा और खूंटी, मारंगहादा तथा मुरहू थानों के अधिकारी शामिल किए गए।
जांच के दौरान पुलिस ने स्कूल परिसर और आसपास के सीसीटीवी फुटेज की पड़ताल की। संदिग्धों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए तकनीकी साक्ष्यों तथा अन्य उपलब्ध सुरागों का भी सहारा लिया गया। बाद में तीन नाबालिगों की गिरफ्तारी और कथित चोरी की संपत्ति की बरामदगी की जानकारी सामने आई।
खूंटी में मौन जुलूस, कचहरी मैदान से भगत सिंह चौक तक पहुंचे लोग
हमले के विरोध में शुक्रवार, 23 अक्टूबर को खूंटी शहर में मसीही समुदाय और आसपास के ग्रामीण इलाकों से आए लोगों ने मौन जुलूस निकाला।
स्थानीय मीडिया लगातार की रिपोर्ट के अनुसार, जुलूस कचहरी मैदान से शुरू होकर मेन रोड के रास्ते भगत सिंह चौक तक पहुंचा। इसके बाद प्रतिभागी वापस लौटकर लोयोला इंटर कॉलेज के मैदान पहुंचे, जहां सामूहिक प्रार्थना की गई और फादर बारला के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की गई।
प्रदर्शन में शामिल लोगों के हाथों में न्याय, शांति और प्रेम का संदेश देने वाली तख्तियां थीं। उनकी प्रमुख मांग थी कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और हमले में शामिल सभी लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
प्रदर्शन के दौरान साप्ताहिक बाजार और जुलूस के कारण यातायात प्रभावित हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, एहतियात के तौर पर प्रशासन ने कुछ वाहनों को वैकल्पिक मार्गों पर भेजा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रमुख स्थानों पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की।
रांची में भी निकला कैंडल मार्च
खूंटी की घटना के विरोध में रांची में भी लोगों ने कैंडल मार्च निकालकर न्याय की मांग की। लगातार की 23 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, रांची भिखारिएट कैथोलिक सभा के आह्वान पर आयोजित इस मार्च में विभिन्न पैरिशों से करीब पांच हजार लोगों के शामिल होने का दावा किया गया।
मार्च का मार्ग डंगराटोली चौक से शुरू होकर जेल रोड और मेन रोड होते हुए अल्बर्ट एक्का चौक तक था। प्रतिभागियों ने हाथों में मोमबत्तियां लेकर हमले की निंदा की और आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की।
आयोजकों ने पुलिस और प्रशासन से निष्पक्ष एवं त्वरित जांच कराने, दोषियों को गिरफ्तार करने, फादर बारला को सुरक्षा देने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने की अपील की। रिपोर्ट के अनुसार, आयोजकों ने स्पष्ट किया कि मार्च का उद्देश्य किसी व्यक्ति या समुदाय के खिलाफ विरोध करना नहीं, बल्कि हिंसा के खिलाफ आवाज उठाना और न्याय तथा सामाजिक शांति की मांग करना था।
फादर बारला की हालत में सुधार, लेकिन चिंता बरकरार
कोटी डायोसिस के विकर जनरल बिसु बेंजामिन ने बताया गया कि फादर बारला की स्थिति में कुछ सुधार हुआ था। उनका रक्तचाप और शुगर स्तर नियंत्रित होने की जानकारी दी गई, जबकि उनके मस्तिष्क में लगी चोट को लेकर डॉक्टरों की चिंता बनी हुई थी। उस समय वह बेहोश थे और चिकित्सकीय निगरानी में उनका इलाज जारी था।
इसलिए उनकी स्थिति को लेकर अंतिम निष्कर्ष देने के बजाय अस्पताल या डायोसिस की ओर से जारी नवीनतम आधिकारिक स्वास्थ्य बुलेटिन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया और न्याय की मांग
इस घटना के बाद खूंटी में स्थानीय लोगों और मसीही समुदाय में नाराजगी देखी गई। विरोध प्रदर्शनों के दौरान लोगों ने आरोपियों की गिरफ्तारी, निष्पक्ष जांच और कानून के तहत सख्त कार्रवाई की मांग की। मौन जुलूस और कैंडल मार्च के जरिए प्रतिभागियों ने शांति, प्रेम और न्याय का संदेश देने की कोशिश की।
चर्च से जुड़े प्रतिनिधियों ने भी जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति या समूह को जिम्मेदार ठहराने से बचने और अफवाहों से दूर रहने की अपील की थी।
निष्कर्ष
फादर बेनेदिक्त बारला पर हमला एक गंभीर आपराधिक घटना है, जिसने खूंटी और रांची में लोगों को चिंता और आक्रोश के साथ सड़कों पर उतरने के लिए प्रेरित किया। पुलिस ने तीन नाबालिग पूर्व छात्रों को गिरफ्तार कर मामले में महत्वपूर्ण कार्रवाई की है, जबकि एक अन्य संदिग्ध की तलाश की जानकारी सामने आई थी।
अब आगे की जांच में हमले की पूरी परिस्थितियों, सभी आरोपियों की भूमिका और उपलब्ध साक्ष्यों को न्यायिक प्रक्रिया के सामने स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा। साथ ही, फादर बारला को बेहतर चिकित्सा सुविधा और सुरक्षा उपलब्ध कराना भी जरूरी है।








