पश्चिमी सिंहभूम, मनोहरपुर 24/10/2026
राज्यपाल के नाम पांच सूत्री ज्ञापन सौंपा, ग्रामसभा के अधिकारों और आदिवासियों की पारंपरिक व्यवस्था की सुरक्षा की उठाई मांग
मनोहरपुर (पश्चिमी सिंहभूम): मनोहरपुर सहित राज्य के विभिन्न क्षेत्रों को नगर पंचायत बनाने के प्रस्ताव के विरोध में झारखंड पुनरुत्थान अभियान की ओर से मनोहरपुर अंचल कार्यालय परिसर के समीप एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया गया। इस दौरान संगठन के प्रतिनिधियों ने प्रस्तावित नगर पंचायत गठन पर आपत्ति जताते हुए अंचल अधिकारी के माध्यम से राज्यपाल के नाम पांच सूत्री ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में प्रस्तावित रिपोर्ट को रद्द करने सहित आदिवासियों के पारंपरिक अधिकारों, ग्रामसभा की शक्तियों और स्थानीय स्वशासन व्यवस्था की सुरक्षा की मांग की गई।धरना को संबोधित करते हुए पूर्व विधायक बहादुर उरांव ने आरोप लगाया कि नगर पंचायत गठन के नाम पर आदिवासी समुदाय के जल, जंगल और जमीन से जुड़े पारंपरिक अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि पांचवीं अनुसूची के क्षेत्रों में संवैधानिक प्रावधानों का पालन करना और ग्रामसभा की भूमिका एवं अधिकारों को सुरक्षित रखना आवश्यक है।उन्होंने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में विकास योजनाएं बनाते समय स्थानीय समाज की परंपराओं, रीति-रिवाजों और पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था को ध्यान में रखा जाना चाहिए। ऐसे किसी भी निर्णय में स्थानीय लोगों के हितों और अधिकारों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।
वहीं, संगठन के केंद्रीय नेता सुन्नी सिंकू ने कहा कि नगर पंचायत गठन के प्रस्ताव से आदिवासी समुदाय के पारंपरिक अधिकारों और ग्रामसभा की शक्तियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। उन्होंने स्थानीय स्वशासन व्यवस्था को मजबूत करने और ग्रामसभा के अधिकारों का सम्मान सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
पांच सूत्री मांगों को लेकर सौंपा ज्ञापन
झारखंड पुनरुत्थान अभियान की ओर से राज्यपाल के नाम सौंपे गए ज्ञापन में पांच प्रमुख मांगें रखी गईं। इनमें समता फैसले का अनुपालन सुनिश्चित करना, वर्ष 2016 के भूमि बैंक को निरस्त करना तथा मनोहरपुर, गुआ, नोवामुंडी और झींकपानी को नगर पंचायत बनाने से संबंधित प्रस्तावित रिपोर्ट को रद्द करना शामिल है।इसके अलावा पात्र आदिवासियों और पारंपरिक वन निवासियों को वन पट्टा उपलब्ध कराने तथा वनोपज के विपणन की उचित व्यवस्था करने की मांग की गई। संगठन ने पेसा अधिनियम, 1996 के प्रावधानों के तहत बालू प्रबंधन का अधिकार ग्रामसभाओं को सौंपने की भी मांग उठाई।
मानकी-मुंडा-डाकुआ व्यवस्था के सम्मान पर जोर
धरना के दौरान संगठन ने आदिवासी क्षेत्रों में प्रचलित पारंपरिक मानकी-मुंडा-डाकुआ व्यवस्था का सम्मान करने की मांग भी रखी। इसके साथ ही स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने तथा जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) कोष से संचालित योजनाओं की न्यायिक समीक्षा कराने की मांग की गई।
संगठन के प्रतिनिधियों ने कहा कि आदिवासी बहुल क्षेत्रों में विकास की प्रक्रिया स्थानीय समुदायों की जरूरतों, परंपराओं और संवैधानिक अधिकारों के अनुरूप होनी चाहिए। उन्होंने प्रशासन से ज्ञापन में उठाए गए मुद्दों पर गंभीरता से विचार कर उचित कार्रवाई करने की अपील की।धरना-प्रदर्शन में झारखंड पुनरुत्थान अभियान के प्रतिनिधियों के साथ स्थानीय ग्रामीण भी शामिल हुए। कार्यक्रम के माध्यम से संगठन ने नगर पंचायत गठन के प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने तथा आदिवासी समाज के पारंपरिक अधिकारों और ग्रामसभा की भूमिका को सुरक्षित रखने की मांग दोहराई।







