न्याय, निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग को लेकर विभिन्न सामाजिक एवं आदिवासी संगठनों का प्रदर्शन
बालाघाट, 3 सितंबर 2026।मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के आदिवासी और बैगा बहुल इलाकों में बच्चों की लगातार हो रही मौतों को लेकर गुरुवार को जिले में बंद का व्यापक असर देखने को मिला। विभिन्न सामाजिक एवं आदिवासी संगठनों के आह्वान पर आयोजित बंद के दौरान बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे और मासूम बच्चों की मौत के मामले में निष्पक्ष जांच, वास्तविक कारणों का पता लगाने तथा जिम्मेदारी तय करने की मांग उठाई।
इस पूरे मामले में मृत बच्चों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आ रहे हैं। आदिवासी संगठनों और आंदोलनकारियों की ओर से 27 बच्चों की मौत का दावा किया गया है, जबकि सरकारी आंकड़ों में अब तक 10 बच्चों की मौत दर्ज होने की बात सामने आई है। इसी आंकड़े के अंतर ने मामले को और गंभीर बना दिया है और लोग वास्तविक स्थिति स्पष्ट किए जाने की मांग कर रहे हैं।
बारिश के बावजूद नहीं थमे लोगों के कदम
गुरुवार को बंद के दौरान खराब मौसम और बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में नागरिक और विभिन्न संगठनों से जुड़े लोग आंदोलन में शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों के बीच बच्चों की मौत को लेकर गहरी नाराजगी और पीड़ा दिखाई दी।
लोगों का कहना था कि यह मुद्दा किसी राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष का नहीं है। यह उन परिवारों का सवाल है जिन्होंने अपने मासूम बच्चों को खोया है। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होना जरूरी है, ताकि यह सामने आ सके कि आखिर इन बच्चों की मौत किन परिस्थितियों में हुई।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
आदिवासी और बैगा बहुल क्षेत्रों में बच्चों की मौत के बाद ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। प्रदर्शनकारियों ने प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, समय पर उपचार, दवाओं की व्यवस्था, टीकाकरण, पोषण और बीमारी की शुरुआती पहचान को लेकर सवाल उठाए।
लोगों ने मांग की कि यह भी जांच की जाए कि प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य विभाग की टीमें समय पर पहुंचीं या नहीं, बीमार बच्चों को आवश्यक उपचार कब मिला और गंभीर स्थिति वाले मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने की पर्याप्त व्यवस्था थी या नहीं।
हालांकि, जांच पूरी होने से पहले किसी अधिकारी या कर्मचारी को सीधे तौर पर दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। वास्तविक जिम्मेदारी जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही तय होनी चाहिए।
सरकार ने बदला CMHO, जांच और कार्रवाई पर निगाह
बच्चों की मौत और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों के बीच सरकार ने बालाघाट के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. परेश उपलव को हटाकर डॉ. मनोज पांडेय को बालाघाट का नया CMHO बनाया है। इससे पहले जिला टीकाकरण अधिकारी और जिला मलेरिया अधिकारी को लेकर भी प्रशासनिक स्तर पर बदलाव किए गए थे।
सरकार की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य निगरानी बढ़ाने की जानकारी भी सामने आई है। 3 सितंबर के स्वास्थ्य विभाग के अपडेट के अनुसार प्रभावित गांवों में घर-घर स्वास्थ्य स्क्रीनिंग, टीकाकरण, दवा वितरण, फॉगिंग और अन्य स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियां जारी हैं।
मौतों की असली संख्या और कारण अब भी बड़ा सवाल
इस पूरे मामले का सबसे संवेदनशील पहलू यही है कि मौतों की संख्या को लेकर सरकारी आंकड़े और स्थानीय संगठनों के दावों में बड़ा अंतर है।
जहां सरकारी स्तर पर 10 बच्चों की मौत का आंकड़ा सामने आया है, वहीं आंदोलनकारी और कुछ मीडिया रिपोर्टें इससे कहीं अधिक मौतों की बात कर रही हैं। यही वजह है कि अब एक ऐसी समयबद्ध और स्वतंत्र जांच की मांग तेज हो गई है, जिससे प्रत्येक मृत्यु के कारण, बच्चे की चिकित्सकीय स्थिति, उपचार की उपलब्धता और प्रशासनिक व्यवस्था की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
प्रभावित परिवारों और स्थानीय लोगों की मांग है कि यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत किया जाए, ताकि भविष्य में किसी परिवार को अपने बच्चे को समय पर इलाज न मिलने की वजह से खोना न पड़े।
बालाघाट बंद के दौरान उठी आवाज का सार यही रहा कि मासूम बच्चों की मौत को केवल आंकड़ों तक सीमित न रखा जाए। प्रत्येक मौत का सच सामने आए, पीड़ित परिवारों को न्याय मिले और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्थायी स्वास्थ्य व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
अब लोगों की निगाहें प्रशासनिक जांच, सरकारी कार्रवाई और इस पूरे मामले की वास्तविक रिपोर्ट पर टिकी हैं।
रिपोर्टर:
रोहित कुमार डोंगरे
डिस्ट्रिक्ट रिपोर्टर, बालाघाट
The Light News India







