6 किलोमीटर लंबी सड़क पर बिखरे पत्थर और गिट्टी, स्वास्थ्य सेवाओं और आवागमन पर पड़ रहा असर
पश्चिमी सिंहभूम, बन्दगांव 19/10/2026
बंदगांव, पश्चिमी सिंहभूम। पश्चिमी सिंहभूम जिले के बंदगांव प्रखंड अंतर्गत लोटा मेन रोड से गोवाई, दुधकुंडी और कोचा गांव तक जाने वाली लगभग 6 किलोमीटर लंबी सड़क की स्थिति बेहद जर्जर हो गई है। ग्रामीणों के अनुसार, करीब पांच साल पहले बनाई गई यह पक्की सड़क निर्माण के एक साल के भीतर ही टूटने लगी थी। आज सड़क पर जगह-जगह बड़े पत्थर और गिट्टी उखड़े पड़े हैं, जिससे लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।यह सड़क चक्रधरपुर से रांची जाने वाले मुख्य मार्ग पर स्थित लोटा से शुरू होती है। चक्रधरपुर से लगभग 28 किलोमीटर दूर इस सड़क की बदहाल स्थिति आसपास के गांवों के लोगों के लिए बड़ी समस्या बन गई है।
एक साल में ही उखड़ने लगी सड़क!
स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक, सड़क का निर्माण करीब पांच साल पहले कराया गया था, लेकिन एक साल के अंदर ही इसकी स्थिति खराब होने लगी। वर्तमान में सड़क पर जगह-जगह पत्थर और गिट्टी निकल आए हैं। कई स्थानों पर चढ़ाई होने के कारण लोगों को पैदल चलने में भी परेशानी होती है।ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की खराब स्थिति के कारण बाइक, साइकिल और अन्य वाहनों से आवागमन करना जोखिम भरा हो गया है। बारिश के मौसम में परेशानी और बढ़ जाती है।
स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ रहा असर
इस सड़क की बदहाली का असर दुधकुंडी गांव में स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, दुधकुंडी में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है, लेकिन सड़क की खराब स्थिति के कारण वहां तक पहुंचने में कठिनाई होती है। इसी वजह से स्वास्थ्य केंद्र को टेबो में बैंक ऑफ इंडिया के मकान के बगल स्थित एक कमरे में संचालित किया जा रहा है।स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े इस मामले में संबंधित विभाग से आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है। यदि सड़क की स्थिति के कारण मरीजों को समय पर स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिल पाती है, तो यह ग्रामीणों के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
प्रशासन से सड़क निर्माण की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित सड़क निर्माण विभाग से जर्जर सड़क की स्थिति पर ध्यान देने की मांग की है। उनकी मांग है कि सड़क की तकनीकी जांच कराई जाए और आवश्यक मरम्मत के साथ इसका दोबारा पक्कीकरण कराया जाए, ताकि लोगों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके।अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस समस्या पर कब तक संज्ञान लेता है और लोटा, गोवाई, दुधकुंडी तथा कोचा के ग्रामीणों को जर्जर सड़क से कब राहत मिलती है।
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