पश्चिमी सिंहभूम, चक्रधरपुर 20/10/2026
चक्रधरपुर (पश्चिमी सिंहभूम): पश्चिमी सिंहभूम जिले के चक्रधरपुर प्रखंड अंतर्गत बिन्दासोरजोम गांव के किसान मंझी सामद ने प्राकृतिक खेती के जरिए कम लागत में बेहतर मुनाफा कमाकर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। उन्होंने महज 3,800 रुपये की लागत से मिश्रित सब्जियों की खेती कर कुल 23,000 रुपये की आय अर्जित की। लागत घटाने के बाद उन्हें 19,200 रुपये का शुद्ध लाभ हुआ।मंझी सामद ने राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त करने के बाद फरवरी 2026 में लगभग 50 डिसमिल जमीन पर मिश्रित सब्जियों की खेती शुरू की। उन्होंने अपने खेत में लौकी, करेला, तोरई, नेनुआ, खीरा और टमाटर जैसी सब्जियों का उत्पादन किया। अलग-अलग सब्जियों की खेती से उन्हें एक ही खेत से विभिन्न प्रकार की फसलें प्राप्त करने का अवसर मिला।
प्राकृतिक खेती अपनाकर घटाई उत्पादन लागत
पहले मंझी सामद खेती के लिए रासायनिक उर्वरकों और महंगे कीटनाशकों पर निर्भर थे। इससे खेती की लागत बढ़ रही थी। इसके बाद उन्होंने प्राकृतिक खेती की पद्धतियों को अपनाया और स्थानीय संसाधनों से कृषि उत्पाद तैयार करना सीखा।उन्होंने मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के लिए जीवामृत और सुपर कम्पोस्ट का उपयोग किया। वहीं, कीट एवं रोग प्रबंधन के लिए नीमास्त्र और अग्निअस्त्र तथा पौधों की वृद्धि के लिए अंडा टॉनिक का इस्तेमाल किया। इससे बाहरी कृषि सामग्री पर निर्भरता कम करने और कम खर्च में खेती करने में मदद मिली।
3,800 रुपये खर्च कर 23,000 रुपये की कमाई
मिश्रित सब्जियों की खेती के पूरे मौसम में मंझी सामद ने कुल 13 बार सब्जियों की तुड़ाई की और लगभग 6 क्विंटल उत्पादन प्राप्त किया।खेती में भूमि की तैयारी पर 1,000 रुपये, बीज पर 1,200 रुपये, प्राकृतिक कृषि उत्पादों पर 800 रुपये और श्रम पर 800 रुपये खर्च हुए। इस तरह कुल लागत 3,800 रुपये रही।सब्जियों की बिक्री से उन्हें 23,000 रुपये की कुल आय हुई। इसमें लौकी बेचकर 12,000 रुपये और अन्य मिश्रित सब्जियों से 11,000 रुपये प्राप्त हुए। कुल आय में से उत्पादन लागत घटाने के बाद उन्हें 19,200 रुपये का शुद्ध लाभ मिला।
किसानों की समृद्धि प्रशासन की प्राथमिकता : उपायुक्त
पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि जिले के किसानों को कम लागत वाली, टिकाऊ और लाभकारी कृषि पद्धतियों से जोड़ना आवश्यक है। प्राकृतिक खेती स्थानीय संसाधनों के उपयोग, मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार और रासायनिक कृषि सामग्री पर निर्भरता कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण विकल्प है।उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन का प्रयास है कि किसानों को विभिन्न योजनाओं के माध्यम से प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और आधुनिक कृषि पद्धतियों की जानकारी उपलब्ध कराई जाए, ताकि वे अपनी उपलब्ध भूमि और स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग कर सकें।उपायुक्त ने मंझी सामद की सफलता को अन्य किसानों के लिए प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती और मिश्रित फसल उत्पादन जैसी पद्धतियों को अपनाकर किसान उत्पादन लागत कम करने, आय के अवसर बढ़ाने और कृषि को दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।प्राकृतिक खेती के जरिए मंझी सामद की यह सफलता बताती है कि सही प्रशिक्षण, स्थानीय संसाधनों के उपयोग और बेहतर फसल प्रबंधन से कम जमीन पर भी अच्छी आय अर्जित करने की संभावनाएं हैं।







